Tuesday, June 22, 2010

अब बिछुड़ने का मलाल था शायद
वो रिश्तो का दलाल था शायद
उसके हाथों में लगा था खून
हमने सोचा गुलाल था शायद
तेरी खुशबु थी महकी महकी
नींद में तेरा ख्याल था शायद
वो मुझे लगातार देखता ही रहा
आँखों में उसके कोई सवाल था शायद
उसे क्या हाले दिल सुनाऊ मैं
वो खुद ही बेहाल था शायद

Sunday, December 6, 2009

बहुत मशहूर हो गया है,
अपनों से दूर हो गया है,
परछाइयो के साथ अकेला रहकर,
तनहाइयो के नशे में चूर हो गया है,

Friday, December 4, 2009

एक अरसे बाद वो आना चाहता है,

गले मिलकर आंसू बहाना चाहता है,

बहुत है कहने सुनने को हमारे बीच,

मगर कुछ है जो वो मुझसे छुपाना चाहता है,

ज़िन्दगी कटी है फुटपाथ पे सदियों जैसी,

सर ढकने को अब एक ठिकाना चाहता है,

जिसे ठुकरा कर चला गया था एक दिन,

आज फिर वही मुझसे याराना चाहता है,

कुछ नगमे चुराकर मेरी ज़िन्दगी से,

ख़ुद को अब शायर दिखाना चाहता है.

Tuesday, February 24, 2009

वही जंग ज़िन्दगी में हरबार है

वही सफर और वही किरदार है

खुबसूरत तस्वीर और रंग बेहतरीन है

एक रोटी और ढेरो हकदार है

मेरे मुल्क में सब गद्दार

यहाँ सिर्फ गरीबी वफादार है

जो लड़ा सच से, सच के लिए

वो गाँधी भी आज शर्मसार है

राजनीती अच्छा खेल है

लेकिन यही खंडहर दीवार है

Thursday, December 25, 2008

बेसबब बिखरती ज़िंदगी,

और बदलते लिबास ज़िंदगी,

कोरे है काग़ज़ जिसके,

ऐसी एक किताब ज़िंदगी,

रिश्तो पे जमी बर्फ,

और फटी लिहाफ़* ज़िंदगी,

कांटो की तरह चुभे है,

मंज़र के निशान ज़िंदगी,

बद्तर हालत मगर हम बेबाक,

यही है मिज़ाज़ ज़िंदगी,

बेहतर है,उम्दा है उनसे,

लहज़े में मिठास ज़िंदगी,

घर से बिखरने की पीड़ा,

एक कड़वा अहसास ज़िंदगी,

अक्सर टूटता हूँ जुदा होकर,

जैसै टूटे तारों का सितार ज़िंदगी।

*लिहाफ़= रज़ाई

Friday, December 12, 2008

दर्द

प्यार तो हर कोई करता है,

मगर उसको जताना चाहिए,

गम मेरा हो या तेरा हो मेरे यार,

उसे मिलकर बाँटना चाहिए,

दर्द आंखों से नज़र आ जाता है,

मगर कुछ को अंदर ही छुपाना चाहिए,

जो आंखे बहुत रोती हैं खुशी में भी,

उन आँखों को भी हसाना चाहिए.