विपिन की ज़िंदगी
Tuesday, June 22, 2010
Sunday, December 6, 2009
Friday, December 4, 2009
एक अरसे बाद वो आना चाहता है,
गले मिलकर आंसू बहाना चाहता है,
बहुत है कहने सुनने को हमारे बीच,
मगर कुछ है जो वो मुझसे छुपाना चाहता है,
ज़िन्दगी कटी है फुटपाथ पे सदियों जैसी,
सर ढकने को अब एक ठिकाना चाहता है,
जिसे ठुकरा कर चला गया था एक दिन,
आज फिर वही मुझसे याराना चाहता है,
कुछ नगमे चुराकर मेरी ज़िन्दगी से,
ख़ुद को अब शायर दिखाना चाहता है.
Tuesday, February 24, 2009
Thursday, December 25, 2008
बेसबब बिखरती ज़िंदगी,
और बदलते लिबास ज़िंदगी,
कोरे है काग़ज़ जिसके,
ऐसी एक किताब ज़िंदगी,
रिश्तो पे जमी बर्फ,
और फटी लिहाफ़* ज़िंदगी,
कांटो की तरह चुभे है,
मंज़र के निशान ज़िंदगी,
बद्तर हालत मगर हम बेबाक,
यही है मिज़ाज़ ज़िंदगी,
बेहतर है,उम्दा है उनसे,
लहज़े में मिठास ज़िंदगी,
घर से बिखरने की पीड़ा,
एक कड़वा अहसास ज़िंदगी,
अक्सर टूटता हूँ जुदा होकर,
जैसै टूटे तारों का सितार ज़िंदगी।
*लिहाफ़= रज़ाई
Friday, December 12, 2008
दर्द
प्यार तो हर कोई करता है,
मगर उसको जताना चाहिए,
गम मेरा हो या तेरा हो मेरे यार,
उसे मिलकर बाँटना चाहिए,
दर्द आंखों से नज़र आ जाता है,
मगर कुछ को अंदर ही छुपाना चाहिए,
जो आंखे बहुत रोती हैं खुशी में भी,
उन आँखों को भी हसाना चाहिए.